हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.25.24

मंडल 8 → सूक्त 25 → श्लोक 24 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 25
स्मद॑भीशू॒ कशा॑वन्ता॒ विप्रा॒ नवि॑ष्ठया म॒ती । म॒हो वा॒जिना॒वर्व॑न्ता॒ सचा॑सनम् ॥ (२४)
मैं मित्रादि देवों की अति नवीन स्तुति द्वारा शोभन रस्सियों वाले, हंटर से युक्त, बुद्धिमानों के योग्य एवं तेज चलने वाले दो घोड़े प्राप्त करता हूं. (२४)
I receive two horses with adorned ropes, full of hunters, worthy of wise men and fast-moving, with the most innovative praise of the friendly gods. (24)