हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.31.3

मंडल 8 → सूक्त 31 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 31
तस्य॑ द्यु॒माँ अ॑स॒द्रथो॑ दे॒वजू॑तः॒ स शू॑शुवत् । विश्वा॑ व॒न्वन्न॑मि॒त्रिया॑ ॥ (३)
देवों की पूजा करने वाले यजमान के पास देवों द्वारा भेजा हुआ तेजस्वी रथ आता है. यजमान उस रथ द्वारा शत्रुओं की समस्त बाधाओं को नष्ट करता हुआ समृद्ध होता है. (३)
The host who worships the gods comes to the magnificent chariot sent by the gods. The host prospers by destroying all the obstacles of the enemies by that chariot. (3)