ऋग्वेद (मंडल 8)
या दम्प॑ती॒ सम॑नसा सुनु॒त आ च॒ धाव॑तः । देवा॑सो॒ नित्य॑या॒शिरा॑ ॥ (५)
हे देवो! जो पतिपत्नी समान विचार से सोमरस निचोड़ते हैं, उसे दशापवित्र द्वारा शुद्ध करते हैं एवं तीसरे सवन में उस में गोदुग्ध मिलाते हैं. (५)
Oh, God! The husbands and wives who squeeze the somras with the same thought, purify it with dashapavittra and add godhudha to it in the third suvan. (5)