हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.31.7

मंडल 8 → सूक्त 31 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 31
न दे॒वाना॒मपि॑ ह्नुतः सुम॒तिं न जु॑गुक्षतः । श्रवो॑ बृ॒हद्वि॑वासतः ॥ (७)
हे देवो! वे पतिपत्नी देवों के प्रति बुरी बातें नहीं करते एवं तुम्हारे प्रति शोभन बुद्धि को समाप्त करना नहीं चाहते. वे अधिक अन्न द्वारा तुम्हारी सेवा करते हैं. (७)
Oh Devas! They do not speak bad things towards the deities, husband and wife and do not want to end their intellect towards you. They serve you with more food. (7)