हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.33.14

मंडल 8 → सूक्त 33 → श्लोक 14 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 33
वह॑न्तु त्वा रथे॒ष्ठामा हर॑यो रथ॒युजः॑ । ति॒रश्चि॑द॒र्यं सव॑नानि वृत्रहन्न॒न्येषां॒ या श॑तक्रतो ॥ (१४)
हे वृत्रहंता एवं सैकड़ों बुद्धियों वाले इंद्र! रथ में जुते हुए घोड़े अन्य लोगों के यज्ञों का तिरस्कार करके तुझ रथ में स्थिर स्वामी को हमारे यज्ञ में लावें. (१४)
O Indra with vrithrahanta and hundreds of intellects! Let the horses that are ploughed in the chariot despise the sacrifices of other people and bring the stable lord in your chariot in our yajna. (14)