ऋग्वेद (मंडल 8)
अ॒स्माक॑म॒द्यान्त॑मं॒ स्तोमं॑ धिष्व महामह । अ॒स्माकं॑ ते॒ सव॑ना सन्तु॒ शंत॑मा॒ मदा॑य द्युक्ष सोमपाः ॥ (१५)
हे परमपूज्य इंद्र! आज अत्यंत समीपवर्ती हमारे स्तोम नामक यज्ञ को धारण करो. हे दीप्तिशाली एवं सोमरस पीने वाले इंद्र! तुम्हारे मद के लिए होने वाले हमारे यज्ञ कल्याणकारक हों. (१५)
O Supreme Indra! Today hold the yajna called Our Stome very near. O Indra, who drinks the radiant and the somras! Let our yajnas for your item be beneficial. (15)