ऋग्वेद (मंडल 8)
जय॑तं च॒ प्र स्तु॑तं च॒ प्र चा॑वतं प्र॒जां च॑ ध॒त्तं द्रवि॑णं च धत्तम् । स॒जोष॑सा उ॒षसा॒ सूर्ये॑ण॒ चोर्जं॑ नो धत्तमश्विना ॥ (११)
हे अश्विनीकुमारो! तुम शत्रुओं को जीतो, स्तोताओं की प्रशंसा एवं रक्षा करो तथा हमें संतान व धन दो. तुम उषा व सूर्य के साथ मिलकर हमें बल दो. (११)
O Ashwinikumaro! You conquer the enemies, praise and protect the psalms, and give us children and money. You join Usha and Surya and strengthen us. (11)