ऋग्वेद (मंडल 8)
गिरो॑ जुषेथामध्व॒रं जु॑षेथां॒ विश्वे॒ह दे॑वौ॒ सव॒नाव॑ गच्छतम् । स॒जोष॑सा उ॒षसा॒ सूर्ये॑ण॒ चेषं॑ नो वोळ्हमश्विना ॥ (६)
हे देव अश्चिनीकुमारो! तुम हमारी स्तुति सुनो, यज्ञ को स्वीकार करो, इस यज्ञ के तीनों सवनों में आओ एवं उषा व सूर्य के साथ मिलकर हमारा अन्न ग्रहण करो. (६)
O God, Ashchinikumaro! Listen to our praise, accept the yajna, come to the three saans of this yajna and take our food together with Usha and the Sun. (6)