हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.36.5

मंडल 8 → सूक्त 36 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 36
ज॒नि॒ताश्वा॑नां जनि॒ता गवा॑मसि॒ पिबा॒ सोमं॒ मदा॑य॒ कं श॑तक्रतो । यं ते॑ भा॒गमधा॑रय॒न्विश्वाः॑ सेहा॒नः पृत॑ना उ॒रु ज्रयः॒ सम॑प्सु॒जिन्म॒रुत्वा॑ँ इन्द्र सत्पते ॥ (५)
हे इंद्र! तुम घोड़ों तथा गायों के जनक हो. हे सज्जनपालक तथा बहुकर्म वाले इंद्र! देवों द्वारा सोमरस के अपने निश्चित भाग को तुम समस्त शत्रुओं एवं वेगों को पराजित करके तथा जल के बीच विजयी बनकर पिओ. (५)
O Indra! You are the father of horses and cows. O gentleman and multi-worked Indra! Drink your certain portion of the Somras by the gods by defeating all the enemies and velocities and victorious among the waters. (5)