हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.4.21

मंडल 8 → सूक्त 4 → श्लोक 21 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 4
वृ॒क्षाश्चि॑न्मे अभिपि॒त्वे अ॑रारणुः । गां भ॑जन्त मे॒हनाश्वं॑ भजन्त मे॒हना॑ ॥ (२१)
मुझे गायरूपी धन मिला तो घोड़ों ने भी प्रसन्नता प्रकट की थी. उनका तात्पर्य यह था कि मेधातिथि ने उत्तम गाएं और घोड़े पाए हैं. (२१)
When I got the money of cow, the horses also expressed happiness. What he meant was that Medhatithi had got the best cows and horses. (21)