हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.5.1

मंडल 8 → सूक्त 5 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 5
दू॒रादि॒हेव॒ यत्स॒त्य॑रु॒णप्सु॒रशि॑श्वितत् । वि भा॒नुं वि॒श्वधा॑तनत् ॥ (१)
दूर रहकर भी पास दीखने वाली एवं दीप्तिशाली उषा जब सब कुछ सफेद कर देती है, तब प्रकाश को अनेक प्रकार से फैलाती है. (१)
Even at a distance, the bright and bright usha, who is close by, when she turns everything white, spreads the light in many ways. (1)