हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.41.2

मंडल 8 → सूक्त 41 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 41
तमू॒ षु स॑म॒ना गि॒रा पि॑तॄ॒णां च॒ मन्म॑भिः । ना॒भा॒कस्य॒ प्रश॑स्तिभि॒र्यः सिन्धू॑ना॒मुपो॑द॒ये स॒प्तस्व॑सा॒ स म॑ध्य॒मो नभ॑न्तामन्य॒के स॑मे ॥ (२)
मैं शोभन-स्तुति द्वारा वरुण तथा स्तोत्रों द्वारा पितरों की प्रशंसा करता हूं. मैं नाभाक ऋषि द्वारा निर्मित प्रशंसाओं से वरुण की स्तुति करता हूं. वरुण नदियों के समीप उदित होते हैं. उनकी सात बहिनें हैं, जिन में वे बीच के है. वे सभी शत्रुओं को मारं. (२)
I praise Varuna by Shobhan-stuti and pitras by stotras. I praise Varun with the accolades produced by Nabhak Rishi. Varuna rises near rivers. He has seven sisters, among whom he is in the middle. They kill all the enemies. (2)