हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.42.1

मंडल 8 → सूक्त 42 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 42
अस्त॑भ्ना॒द्द्यामसु॑रो वि॒श्ववे॑दा॒ अमि॑मीत वरि॒माणं॑ पृथि॒व्याः । आसी॑द॒द्विश्वा॒ भुव॑नानि स॒म्राड्विश्वेत्तानि॒ वरु॑णस्य व्र॒तानि॑ ॥ (१)
समस्त धन के स्वामी एवं शक्तिशाली वरुण ने द्युलोक को धारण किया, धरती के परिमाण को नापा एवं सभी भुवनों के सम्राट्‌ बनकर बैठे. वरुण के सभी कार्य इसी प्रकार के हैं. (१)
The lord and powerful Varuna of all wealth held the dolok, measured the magnitude of the earth and sat as emperor of all the bhuvanas. All of Varun's works are of the same kind. (1)