हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.43.29

मंडल 8 → सूक्त 43 → श्लोक 29 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 43
तुभ्यं॒ घेत्ते जना॑ इ॒मे विश्वाः॑ सुक्षि॒तयः॒ पृथ॑क् । धा॒सिं हि॑न्व॒न्त्यत्त॑वे ॥ (२९)
हे अग्नि! ये सब सेवक एवं शोभन प्रजाएं तुम्हारे भक्षण के लिए अलग अन्न देती हैं. (२९)
O agni! All these servants and brave people give you separate food for your food. (29)