हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.43.6

मंडल 8 → सूक्त 43 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 43
कृ॒ष्णा रजां॑सि पत्सु॒तः प्र॒याणे॑ जा॒तवे॑दसः । अ॒ग्निर्यद्रोध॑ति॒ क्षमि॑ ॥ (६)
जातवेद अग्नि जिस समय धरती पर सूखी लकड़ियों को जलाते हैं, तब अग्नि के गमन के समय धरती की धूल काली हो जाती है. (६)
When the Jatveda agni burns dry wood on the earth, the dust of the earth becomes black at the time of the movement of the agni. (6)