ऋग्वेद (मंडल 8)
धा॒सिं कृ॑ण्वा॒न ओष॑धी॒र्बप्स॑द॒ग्निर्न वा॑यति । पुन॒र्यन्तरु॑णी॒रपि॑ ॥ (७)
अग्नि ओषधियों को अन्न समझकर भक्षण करते हुए शांत नहीं होते. वे युवा ओषधियों की ओर जाते हैं. (७)
The agni medicines are not considered food and eating and not calming down. They go to young herbs. (7)