हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.44.27

मंडल 8 → सूक्त 44 → श्लोक 27 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 44
य॒ज्ञानां॑ र॒थ्ये॑ व॒यं ति॒ग्मज॑म्भाय वी॒ळवे॑ । स्तोमै॑रिषेमा॒ग्नये॑ ॥ (२७)
हम यज्ञों के नेता, तीखी ज्वालाओं वाले एवं शक्तिशाली अग्नि के लिए स्तुतियां करना चाहते हैं. (२७)
We want to praise the leader of the yagnas, the sharp flames and the mighty agni. (27)