हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.44.9

मंडल 8 → सूक्त 44 → श्लोक 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 44
स॒मि॒धा॒न उ॑ सन्त्य॒ शुक्र॑शोच इ॒हा व॑ह । चि॒कि॒त्वान्दैव्यं॒ जन॑म् ॥ (९)
हे सेवा स्वीकार करने वाले एवं उज्ज्वल दीप्तियुक्त अग्नि! तुम प्रज्वलित होते हुए एवं देवों के भक्तजनों को जानते हुए इस यज्ञ में आओ. (९)
O service-accepting and bright agni! You come to this yagna by being ignited and knowing the devotees of the gods. (9)