हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.45.23

मंडल 8 → सूक्त 45 → श्लोक 23 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 45
मा त्वा॑ मू॒रा अ॑वि॒ष्यवो॒ मोप॒हस्वा॑न॒ आ द॑भन् । माकीं॑ ब्रह्म॒द्विषो॑ वनः ॥ (२३)
हे इंद्र! बुद्धिहीन लोग अपनी रक्षा की इच्छा से तुम्हारी हिंसा न करें और न तुम्हारी हंसी उड़ावें. उन ब्राह्मणद्वेषियों के पास मत जाना. (२३)
O Indra! The mindless should not violence you or make fun of you with the desire to protect them. Don't go to those Brahmins. (23)