हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.45.33

मंडल 8 → सूक्त 45 → श्लोक 33 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 45
तवेदु॒ ताः सु॑की॒र्तयोऽस॑न्नु॒त प्रश॑स्तयः । यदि॑न्द्र मृ॒ळया॑सि नः ॥ (३३)
हे इंद्र! जिनके द्वारा तुम हमें सुखी करते हो, वे शोभन प्रसिद्धियां एवं स्तुतियां तुम्हारी ही रहें. (३३)
O Indra! By which you make us happy, let the fames and praises be yours. (33)