हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.45.34

मंडल 8 → सूक्त 45 → श्लोक 34 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 45
मा न॒ एक॑स्मि॒न्नाग॑सि॒ मा द्वयो॑रु॒त त्रि॒षु । वधी॒र्मा शू॑र॒ भूरि॑षु ॥ (३४)
हे शूर इंद्र! हमें एक, दो, तीन अथवा बहुत अपराध करने पर मत मारना. (३४)
O Shur Indra! Don't kill us for committing one, two, three or too many crimes. (34)