ऋग्वेद (मंडल 8)
बि॒भया॒ हि त्वाव॑त उ॒ग्राद॑भिप्रभ॒ङ्गिणः॑ । द॒स्माद॒हमृ॑ती॒षहः॑ ॥ (३५)
हे इंद्र! तुम्हारे समान उग्र, शत्रुओं पर प्रहार करने वाले, पापों को क्षीण करने वाले एवं शत्रुओं की हिंसा करने वाले देव के कारण मैं भयरहित बनूं. (३५)
O Indra! I may be without fear because of God who is as fierce as you, who attacks enemies, who undermines sins, and who does violence against enemies. (35)