हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.47.11

मंडल 8 → सूक्त 47 → श्लोक 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 47
आदि॑त्या॒ अव॒ हि ख्यताधि॒ कूला॑दिव॒ स्पशः॑ । सु॒ती॒र्थमर्व॑तो य॒थानु॑ नो नेषथा सु॒गम॑ने॒हसो॑ व ऊ॒तयः॑ सुऊ॒तयो॑ व ऊ॒तयः॑ ॥ (११)
हे आदित्यो! जिस प्रकार तट पर खड़ा हुआ व्यक्ति जल को देखता है, उसी प्रकार तुम हम निम्नस्थ लोगों को देखो. घोड़े को जिस प्रकार उत्तम घाट पर ले जाते हैं उसी प्रकार हमें शोभन मार्ग पर ले जाओ. तुम्हारी रक्षा उपद्रवरहित एवं शोभन है. (११)
Hey Aditya! Just as a person standing on the shore sees the water, so you look at the lowly ones. Take us on the shobhan way just as the best take the horse to the ghat. Your defense is hassle-free and adorning. (11)