हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.47.12

मंडल 8 → सूक्त 47 → श्लोक 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 47
नेह भ॒द्रं र॑क्ष॒स्विने॒ नाव॒यै नोप॒या उ॒त । गवे॑ च भ॒द्रं धे॒नवे॑ वी॒राय॑ च श्रवस्य॒ते॑ऽने॒हसो॑ व ऊ॒तयः॑ सुऊ॒तयो॑ व ऊ॒तयः॑ ॥ (१२)
हे आदित्यो! हमसे द्वेष करने वाले शक्तिशाली को इस धरती पर सुख न मिले. तुम्हारा सुख गाय, नई ब्याई धेनु एवं अन्न की अभिलाषा रखने वाले शोभन पुत्र को प्राप्त हो. तुम्हारी रक्षा उपद्रवरहित एवं शोभन है. (१२)
Hey Aditya! May the powerful who hate us not find happiness on this earth. May your happiness be given to the cow, the new bride, the bride, the son of Adhanu and Shobhan, who desires food. Your defense is hassle-free and adorning. (12)