हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.48.14

मंडल 8 → सूक्त 48 → श्लोक 14 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 48
त्राता॑रो देवा॒ अधि॑ वोचता नो॒ मा नो॑ नि॒द्रा ई॑शत॒ मोत जल्पिः॑ । व॒यं सोम॑स्य वि॒श्वह॑ प्रि॒यासः॑ सु॒वीरा॑सो वि॒दथ॒मा व॑देम ॥ (१४)
हे रक्षक देवो! हमसे मीठे वचन बोलो. स्वप्र हमें अपने वश में न करें और निंदा करने वाले हमारी निंदा न करें. हम सदा सोम के प्रिय रहें एवं शोभन संतान पाकर स्तुतियों का उच्चरण करें. (१४)
O protector god! Speak sweet words to us. Don't let yourself subdue us, and let the condemners not condemn us. Let us always be dear to Som and receive the glorious children and exalt the praises. (14)