हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.48.13

मंडल 8 → सूक्त 48 → श्लोक 13 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 48
त्वं सो॑म पि॒तृभिः॑ संविदा॒नोऽनु॒ द्यावा॑पृथि॒वी आ त॑तन्थ । तस्मै॑ त इन्दो ह॒विषा॑ विधेम व॒यं स्या॑म॒ पत॑यो रयी॒णाम् ॥ (१३)
हे सोम! तुम पितरों के साथ मिलकर द्यावा-पृथिवी का विस्तार करते हो. हम हवि के दवारा तुम्हारी सेवा करें एवं धन के स्वामी बनें. (१३)
Hey Mon! Together with the fathers, you expand the dyava-prithvivi. Let us serve you through havi and become masters of wealth. (13)