हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.49.4

मंडल 8 → सूक्त 49 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 49
अद्रो॑घ॒मा व॑होश॒तो य॑विष्ठ्य दे॒वाँ अ॑जस्र वी॒तये॑ । अ॒भि प्रयां॑सि॒ सुधि॒ता व॑सो गहि॒ मन्द॑स्व धी॒तिभि॑र्हि॒तः ॥ (४)
हे अतिशय युवा एवं नित्य अग्नि! मुझ द्रोहशून्य यजमान की अभिलाषा करने वाले देवों को हव्यभक्षण के लिए लाओ. हे निवासस्थान देने वाले अग्नि! सुनिहित अन्नों को लेकर आओ एवं स्तुतियों द्वारा स्थापित होकर प्रसन्न बनो. (४)
O very young and eternal agni! Bring the gods who desire me to be the disobedient host for lust. O agni that gives you the place of residence! Bring the well-nourished grains and be happy to be established by praises. (4)