हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.49.6

मंडल 8 → सूक्त 49 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 49
शोचा॑ शोचिष्ठ दीदि॒हि वि॒शे मयो॒ रास्व॑ स्तो॒त्रे म॒हाँ अ॑सि । दे॒वानां॒ शर्म॒न्मम॑ सन्तु सू॒रयः॑ शत्रू॒षाहः॑ स्व॒ग्नयः॑ ॥ (६)
हे अतिशय पवित्र अग्नि! तुम स्वयं दीप्त बनो एवं हमें दीप्त बनाओ तथा प्रजा और स्तोता को सुख दो. तुम महान्‌ हो. मेरे स्तोता देवों द्वारा दिया हुआ सुख प्राप्त करें एवं शोभन अग्नि वाले बनें. (६)
O very holy agni! You yourself become deep and make us deep and give happiness to the people and the psalms. You are great. Get the happiness given by my stota devas and become shobhan agni wale. (6)