हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.5.37

मंडल 8 → सूक्त 5 → श्लोक 37 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 5
ता मे॑ अश्विना सनी॒नां वि॒द्यातं॒ नवा॑नाम् । यथा॑ चिच्चै॒द्यः क॒शुः श॒तमुष्ट्रा॑नां॒ दद॑त्स॒हस्रा॒ दश॒ गोना॑म् ॥ (३७)
हे अश्चिनीकुमारो! तुम मुझे देने के लिए श्रेष्ठ एवं भोगयोग्य धन को जानो. चेदिवंश में उत्पन्न राजा कशु ने मुझे सी ऊंट और हजार गाएं दी हैं. तुम उन्हें जानो. (३७)
O aschinikumaro! Know the best and consumable wealth to give me. King Kashu, born in the Chedivansh, has given me the C camel and a thousand songs. You know them. (37)