ऋग्वेद (मंडल 8)
अ॒द्याद्या॒ श्वःश्व॒ इन्द्र॒ त्रास्व॑ प॒रे च॑ नः । विश्वा॑ च नो जरि॒तॄन्स॑त्पते॒ अहा॒ दिवा॒ नक्तं॑ च रक्षिषः ॥ (१७)
हे इंद्र! आज, कल एवं परसों हमारी रक्षा करना. हे साधुपालक इंद्र! हम स्तोताओं की रक्षा रात एवं दिन सब समय करना. (१७)
O Indra! Protect us today, tomorrow and the day after. O Lord Indra! We protect the psalmists all the time of night and day. (17)