हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.50.18

मंडल 8 → सूक्त 50 → श्लोक 18 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 50
प्र॒भ॒ङ्गी शूरो॑ म॒घवा॑ तु॒वीम॑घः॒ सम्मि॑श्लो वि॒र्या॑य॒ कम् । उ॒भा ते॑ बा॒हू वृष॑णा शतक्रतो॒ नि या वज्रं॑ मिमि॒क्षतुः॑ ॥ (१८)
धनस्वामी, दूसरों को हराने वाले, शूर एवं अधिक संपत्ति वाले इंद्र वीरता के लिए सबसे मिलते हैं. हे बहुत कर्मो वाले इंद्र! तुम्हारी दोनों अभिलाषापूरक भुजाएं वज्र धारण करें. (१८)
Indra, the lord of wealth, the one who defeats others, the brave and the one with more wealth, is the most beloved for bravery. O Indra, who has done a lot! Wear thunderbolts on both your lustful arms. (18)