हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.52.2

मंडल 8 → सूक्त 52 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 52
दि॒वो मानं॒ नोत्स॑द॒न्सोम॑पृष्ठासो॒ अद्र॑यः । उ॒क्था ब्रह्म॑ च॒ शंस्या॑ ॥ (२)
सोमरस कुचलने के साधन पत्थरों ने स्वर्ग का निर्माण करने वाले इंद्र का त्याग नहीं किया. उकथमंत्र एवं स्तुतियां बोलने योग्य हैं. (२)
The stones of the means of crushing the Somras did not forsake Indra, who created heaven. Ukathamtra and praises are worth speaking. (2)