हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.54.1

मंडल 8 → सूक्त 54 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 54
यदि॑न्द्र॒ प्रागपा॒गुद॒ङ्न्य॑ग्वा हू॒यसे॒ नृभिः॑ । आ या॑हि॒ तूय॑मा॒शुभिः॑ ॥ (१)
हे इंद्र! तुम हमारे अध्वर्युजनों द्वारा पूर्व, पश्चिम, उत्तर एवं नीचे की दिशा में बुलाए जाते हो. तुम अपने घोड़ों की सहायता से जल्दी आओ. (१)
O Indra! You are called by our followers in the east, west, north and down direction. You come quickly with the help of your horses. (1)