ऋग्वेद (मंडल 8)
शश्व॑न्तं॒ हि प्र॑चेतसः प्रति॒यन्तं॑ चि॒देन॑सः । देवाः॑ कृणु॒थ जी॒वसे॑ ॥ (१७)
हे उत्तम ज्ञान वाले देवो! हमारी ओर बार-बार आने वाले पापी शत्रुओं को हमारे जीवन के लिए हमसे अलग करो. (१७)
O gods of the best knowledge! Separate sinners who come to us again and again from us for our lives. (17)