ऋग्वेद (मंडल 8)
सु॒दे॒वो अ॑सि वरुण॒ यस्य॑ ते स॒प्त सिन्ध॑वः । अ॒नु॒क्षर॑न्ति का॒कुदं॑ सू॒र्म्यं॑ सुषि॒रामि॑व ॥ (१२)
हे वरुण! तुम शोभन देव हो. तुम्हारे समुद्ररूपी तालु में गंगा आदि सात नदियां इस प्रकार गिरती हैं जिस प्रकार सूर्य के सामने किरणें गिरती हैं. (१२)
Hey Varun! You are Shobhan Dev. In your sea-like palate, seven rivers like the Ganga, etc., fall in the same way as the rays fall in front of the sun. (12)