ऋग्वेद (मंडल 8)
एतावतश्चिश्चदेषां सुम्नं भिक्षेत मर्त्यः, अदाभ्यस्य मन्मभिः.. (१५)
स्तोता अपने स्तोत्रों द्वारा अपराजेय मरुतों से अपना सुख मांगता है. (१५)
The psalms, through their hymns, ask for their happiness from the unbeatable maruts. (15)
मंडल 8 → सूक्त 7 → श्लोक 15 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation