हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.7.35

मंडल 8 → सूक्त 7 → श्लोक 35 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 7
आकषणयावानो वहन्त्यन्तरिक्षेण पततः. धातारः स्तुवते वयः.. (३५)
दूरदूर तक जाने वाले अश्व आकाश मार्ग से चलकर मरुतों को लाते हैं एवं स्तुति करने वाले को अन्न देते हैं. (३५)
Horses going far and wide walk through the sky and bring the maruts and give food to those who praise them. (35)