हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 72
दे॒वाना॒मिदवो॑ म॒हत्तदा वृ॑णीमहे व॒यम् । वृष्णा॑म॒स्मभ्य॑मू॒तये॑ ॥ (१)
हे अभिलाषापूरक देवो! हम अपने यज्ञ के उद्देश्य से तुम्हारी विशाल रक्षा पाने के लिए प्रार्थना करते हैं. (१)
Oh, god of desire! We pray for the purpose of our yajna to get your huge protection. (1)

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 72
ते नः॑ सन्तु॒ युजः॒ सदा॒ वरु॑णो मि॒त्रो अ॑र्य॒मा । वृ॒धास॑श्च॒ प्रचे॑तसः ॥ (२)
हे देवो! शोभन स्तुति वाले एवं हमारे धनवर्धक वरुण, मित्र एवं अर्यमा हमारे सहायक हों. (२)
Oh, God! May the brave-praised and our rich Varun, friends and Aryama be our helpers. (2)

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 72
अति॑ नो विष्पि॒ता पु॒रु नौ॒भिर॒पो न प॑र्षथ । यू॒यमृ॒तस्य॑ रथ्यः ॥ (३)
हे यज्ञ के नेता देवो! जिस प्रकार नाव जल के पार ले जाती है, उसी प्रकार तुम हमें विशाल शत्रुसेना के पार ले जाओ. (३)
O god, the leader of the yajna! Just as the boat takes us across the water, so you take us across the great enemy army. (3)

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 72
वा॒मं नो॑ अस्त्वर्यमन्वा॒मं व॑रुण॒ शंस्य॑म् । वा॒मं ह्या॑वृणी॒महे॑ ॥ (४)
हे अर्यमा देव! हमें अपनाने योग्य धन दो. हे वरुण! हमारे पास सबके द्वारा प्रशंसा करने योग्य धन हो. हम तुमसे धन मांगते हैं. (४)
O God! Give us the money that is adopted. Hey Varun! We have money worth praising by everyone. We ask you for money. (4)

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 72
वा॒मस्य॒ हि प्र॑चेतस॒ ईशा॑नाशो रिशादसः । नेमा॑दित्या अ॒घस्य॒ यत् ॥ (५)
हे उत्तम ज्ञान वाले एवं शत्रुओं को भगाने वाले देवों! तुम उत्तम धन के स्वामी हो. हे आदित्यो! वह धन हमारे पास न आए जो पाप द्वारा कमाया गया हो. (५)
O gods of good knowledge and those who drive away enemies! You are the master of the best wealth. Hey Aditya! Let us not come to us the money that has been earned by sin. (5)

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 72
व॒यमिद्वः॑ सुदानवः क्षि॒यन्तो॒ यान्तो॒ अध्व॒न्ना । देवा॑ वृ॒धाय॑ हूमहे ॥ (६)
हे शोभनदान वाले देवो! हम चाहे अग्निहोत्र हेतु घर में रहते हों अथवा समिधाएं लाने हेतु मार्ग में हों, हम तुम्हें हव्य द्वारा बढ़ने के लिए बुलाते हैं. (६)
O god of adornment! Whether we live in the house for agnihotra or are on the way to bring the samidahas, we call you to grow by the means of the week. (6)

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 72
अधि॑ न इन्द्रैषां॒ विष्णो॑ सजा॒त्या॑नाम् । इ॒ता मरु॑तो॒ अश्वि॑ना ॥ (७)
हे इंद्र! विष्णु, मरुद्गण एवं अश्विनीकुमारो! समान जाति वाले लोगों में तुम हमारे ही पास आओ. (७)
O Indra! Vishnu, Marudgana and Ashwinikumaro! You come to us among the same jati people. (7)

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 72
प्र भ्रा॑तृ॒त्वं सु॑दान॒वोऽध॑ द्वि॒ता स॑मा॒न्या । मा॒तुर्गर्भे॑ भरामहे ॥ (८)
हे शोभनदान वाले देवो! हम समानरूप से तुम्हारी माता के गर्भ से दो-दो के रूप में उत्पन्न होना प्रकट करेंगे. इसके बाद आपकी बंधुता सिद्ध करेंगे. (८)
O god of adornment! We will appear to be born equally as two from your mother's womb. After this, you will prove your brotherhood. (8)
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