हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.72.6

मंडल 8 → सूक्त 72 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 72
व॒यमिद्वः॑ सुदानवः क्षि॒यन्तो॒ यान्तो॒ अध्व॒न्ना । देवा॑ वृ॒धाय॑ हूमहे ॥ (६)
हे शोभनदान वाले देवो! हम चाहे अग्निहोत्र हेतु घर में रहते हों अथवा समिधाएं लाने हेतु मार्ग में हों, हम तुम्हें हव्य द्वारा बढ़ने के लिए बुलाते हैं. (६)
O god of adornment! Whether we live in the house for agnihotra or are on the way to bring the samidahas, we call you to grow by the means of the week. (6)