ऋग्वेद (मंडल 8)
क्षेति॒ क्षेमे॑भिः सा॒धुभि॒र्नकि॒र्यं घ्नन्ति॒ हन्ति॒ यः । अग्ने॑ सु॒वीर॑ एधते ॥ (९)
हे अग्नि! जो व्यक्ति उत्तम रक्षासाधनों के साथ अपने घर में रहता है, उसे कोई नहीं मारता. जो अपने शत्रुओं को स्वयं मारता है, वह शोभन संतान के साथ बढ़ता है. (९)
O agni! The person who lives in his house with the best defenses, no one kills him. He who kills his enemies himself grows up and have brave children. (9)