ऋग्वेद (मंडल 8)
छ॒र्दिर्य॑न्त॒मदा॑भ्यं॒ विप्रा॑य स्तुव॒ते न॑रा । मध्वः॒ सोम॑स्य पी॒तये॑ ॥ (५)
हे नेता अश्विनीकुमारो! स्तुति करने वाले ब्राह्मण कृष्ण के लिए शत्रुओं की हिंसा से रहित घर दो एवं सोमरस पीने के लिए आओ. (५)
O leader Ashwinikumaro! Come to the house devoid of the violence of the enemies and drink somras for krishna, the brahmin who praises him. (5)