हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.76.5

मंडल 8 → सूक्त 76 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 76
आ नू॒नं या॑तमश्वि॒नाश्वे॑भिः प्रुषि॒तप्सु॑भिः । दस्रा॒ हिर॑ण्यवर्तनी शुभस्पती पा॒तं सोम॑मृतावृधा ॥ (५)
हे अश्चिनीकुमारो! तुम दीप्तिशाली रूपवाले घोड़ों के साथ यहां आओ. हे दर्शनीय सोने के रथ वाले, जल के स्वामी एवं यज्ञ की वृद्धि करने वाले अश्विनीकुमारो! सोमरस पिओ. (५)
O aschinikumaro! You come here with horses with a bright look. O you of the golden chariot, the lord of the water and ashwinikumaro who increases the yagna! Drink the somras. (5)