हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.77.2

मंडल 8 → सूक्त 77 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 77
द्यु॒क्षं सु॒दानुं॒ तवि॑षीभि॒रावृ॑तं गि॒रिं न पु॑रु॒भोज॑सम् । क्षु॒मन्तं॒ वाजं॑ श॒तिनं॑ सह॒स्रिणं॑ म॒क्षू गोम॑न्तमीमहे ॥ (२)
हम दीप्तिशाली, शोभन-दान वाले, बलों से युक्त तथा पर्वत के समान अनेक लोगों का पालन करने वाले, इंद्र से बोलने वाले पुत्र-पौत्र, हजारों एवं सैकड़ों धनों से युक्त गाएं एवं अन्न शीघ्र मांगते हैं. (२)
We ask for beautiful, beautiful, armed and mountain-like people, sons and grandsons who speak to Indra, with thousands and hundreds of riches and ask for food soon. (2)