हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.78.5

मंडल 8 → सूक्त 78 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 78
यज्जाय॑था अपूर्व्य॒ मघ॑वन्वृत्र॒हत्या॑य । तत्पृ॑थि॒वीम॑प्रथय॒स्तद॑स्तभ्ना उ॒त द्याम् ॥ (५)
हे अभूतपूर्व एवं धनस्वामी इंद्र! जब वृत्र की हत्या करने के लिए तुमने धरती को दृढ़ एवं द्युलोक को विरुद्ध किया. (५)
O unprecedented and wealthy Indra! When you strengthened the earth and opposed the world to kill the vrithra. (5)