हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.81.13

मंडल 8 → सूक्त 81 → श्लोक 13 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 81
विश्वा॒ हि म॑र्त्यत्व॒नानु॑का॒मा श॑तक्रतो । अग॑न्म वज्रिन्ना॒शसः॑ ॥ (१३)
हे सौ यज्ञों वाले इंद्र! संसार के सभी लोग इच्छाएं रखते हैं. हे वज्रधारी इंद्र! हम भी मनचाही वस्तुएं प्राप्त करें. (१३)
O Indra of a hundred yagnas! All the people of the world have desires. O thunderbolt Indra! We also get the desired items. (13)