हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.82.21

मंडल 8 → सूक्त 82 → श्लोक 21 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 82
अ॒भी षु ण॒स्त्वं र॒यिं म॑न्दसा॒नः स॑ह॒स्रिण॑म् । प्र॒य॒न्ता बो॑धि दा॒शुषे॑ ॥ (२१)
हे इंद्र! तुम हमारे दिए हुए सोम से प्रसन्न होकर हमारे लिए हजारों धन दो एवं हव्यदाता यजमान को धन देने का विचार करो. (२१)
O Indra! If you are pleased with our given mon, give us thousands of money and consider giving money to the havyadata host. (21)