हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.82.30

मंडल 8 → सूक्त 82 → श्लोक 30 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 82
त्वामिद्वृ॑त्रहन्तम सु॒ताव॑न्तो हवामहे । यदि॑न्द्र मृ॒ळया॑सि नः ॥ (३०)
हे असुरहंताओं में श्रेष्ठ इंद्र! तुम हमें सुखी करना चाहते हो तो सोमरस निचोड़ने वाले हम तुम्हें बुलाते हैं. (३०)
O Indra, the best of the asuras! If you want to make us happy, we call you to squeeze the somras. (30)