हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.82.9

मंडल 8 → सूक्त 82 → श्लोक 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 82
गि॒रा वज्रो॒ न सम्भृ॑तः॒ सब॑लो॒ अन॑पच्युतः । व॒व॒क्ष ऋ॒ष्वो अस्तृ॑तः ॥ (९)
स्तोताओं द्वारा स्तुतियां सुनकर वज्र के समान तीक्ष्ण बनाए गए, बलवान्‌ अपराजित दीप्तिशाली एवं युद्ध में शत्रुओं से न दबने वाले इंद्र स्तोताओं के लिए धन आदि वहन करने की इच्छा करते हैं. (९)
After listening to the praises by the stotas, indra wants to bear money etc. for the stomatas who have been made sharp like a thunderbolt, strong undefeated, radiant and do not be suppressed by enemies in war. (9)