हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 8.83.7

मंडल 8 → सूक्त 83 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 8)

ऋग्वेद: | सूक्त: 83
कद॑त्विषन्त सू॒रय॑स्ति॒र आप॑ इव॒ स्रिधः॑ । अर्ष॑न्ति पू॒तद॑क्षसः ॥ (७)
बुद्धिमान्‌ एवं जलों के समान तिरछे चलने वाले मरुद्गण कब दीप्त होते हैं. श्रुहननकर्तता एवं पवित्र शक्ति वाले मरुद्गण हमारे यज्ञ की ओर आते हैं. (७)
When do the intelligent and water-like slanted deserts glow? The deserts with shravanankarta and holy spirit come towards our yajna. (7)