ऋग्वेद (मंडल 8)
गौर्ध॑यति म॒रुतां॑ श्रव॒स्युर्मा॒ता म॒घोना॑म् । यु॒क्ता वह्नी॒ रथा॑नाम् ॥ (१)
धनवान् मरुतों की माता, अन्न की अभिलाषा करने वाली, मरुतों को संयुक्त करने वाली एवं सर्वत्र पूजनीय पृश्चि मरुतों को सोमरस पिलाती हैं. (१)
The mother of the rich, the one who desires food, the one who unites the maruts and the revered earth everywhere, gives somras to the maruts. (1)
ऋग्वेद (मंडल 8)
यस्या॑ दे॒वा उ॒पस्थे॑ व्र॒ता विश्वे॑ धा॒रय॑न्ते । सूर्या॒मासा॑ दृ॒शे कम् ॥ (२)
सभी देव पृश्नि की गोद में रहकर व्रत धारण करते हैं. सूर्य एवं चंद्रमा उसके समीप सुख से रहते हैं. (२)
All the gods observe fast in the lap of the earth. The sun and the moon live happily near it. (2)
ऋग्वेद (मंडल 8)
तत्सु नो॒ विश्वे॑ अ॒र्य आ सदा॑ गृणन्ति का॒रवः॑ । म॒रुतः॒ सोम॑पीतये ॥ (३)
इधर-उधर जाने वाले हमारे सब स्तोता सोमरस पीने के लिए सदा मरुतों की स्तुति करते हैं. (३)
All our stotas who go around always praise the maruts for drinking somras. (3)
ऋग्वेद (मंडल 8)
अस्ति॒ सोमो॑ अ॒यं सु॒तः पिब॑न्त्यस्य म॒रुतः॑ । उ॒त स्व॒राजो॑ अ॒श्विना॑ ॥ (४)
यह सोम निचोड़ा गया है. स्वयं तेजस्वी मरुद्गण एवं अश्विनीकुमार उसका अंश पीते हैं. (४)
It's been som squeezed. Tejasvi Marudgana and Ashwinikumar themselves drink part of it. (4)
ऋग्वेद (मंडल 8)
पिब॑न्ति मि॒त्रो अ॑र्य॒मा तना॑ पू॒तस्य॒ वरु॑णः । त्रि॒ष॒ध॒स्थस्य॒ जाव॑तः ॥ (५)
मित्र, अर्यमा और वरुण दशापवित्र द्वारा छने हुए, तीन पात्रों में स्थित एवं प्रशंसनीय जन्म पाने वाले सोम को पीते हैं. (५)
Friends, Arayama and Varuna, dressed up by Dashapavittra, drink the som, who is located in three characters and is born admirable. (5)
ऋग्वेद (मंडल 8)
उ॒तो न्व॑स्य॒ जोष॒माँ इन्द्रः॑ सु॒तस्य॒ गोम॑तः । प्रा॒तर्होते॑व मत्सति ॥ (६)
होता जिस प्रकार प्रातःकाल देवों की स्तुति करता है, उसी प्रकार इंद्र हमारे द्वारा निचोड़े गए व गाय के दूध-दही से मिले हुए सोम की स्तुति द्वारा प्रशंसा करते हैं. (६)
Just as the morning praises the gods, Indra praises the som, which is squeezed by us and mixed with cow's milk-curd. (6)
ऋग्वेद (मंडल 8)
कद॑त्विषन्त सू॒रय॑स्ति॒र आप॑ इव॒ स्रिधः॑ । अर्ष॑न्ति पू॒तद॑क्षसः ॥ (७)
बुद्धिमान् एवं जलों के समान तिरछे चलने वाले मरुद्गण कब दीप्त होते हैं. श्रुहननकर्तता एवं पवित्र शक्ति वाले मरुद्गण हमारे यज्ञ की ओर आते हैं. (७)
When do the intelligent and water-like slanted deserts glow? The deserts with shravanankarta and holy spirit come towards our yajna. (7)
ऋग्वेद (मंडल 8)
कद्वो॑ अ॒द्य म॒हानां॑ दे॒वाना॒मवो॑ वृणे । त्मना॑ च द॒स्मव॑र्चसाम् ॥ (८)
हे महान्, दर्शनीय तेज वाले एवं स्वयं दीप्तिशाली मरुतो! मैं तुम्हारा पालन कब वरण करूंगा? (८)
O great, the glorious maruto himself, the glorious one of the magnificent, the magnificent ones! When will I follow you? (8)